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Friday, August 12, 2011

रिश्ता बड़ा या प्यार ?


मुझमे एहसास है ,मुझसे परिवार है
मुझमे एहसास है ,मुझमे परिवार है
मै परिवार में हूँ, मुझमे प्यार है
सच ! परिवार में प्यार है
पर घर पर सबका अधिकार है !

घर में रहें या परिवार में
एहसास अब सिमटने लगे हैं
रिश्तों के बर्फ अब पिघलने लगे हैं
कुछ मिलने लगा है कुछ खोने लगा है
रिश्तों से घर बनता है और प्यार से परिवार
फिर रिश्ता बड़ा या प्यार ?

ओह घर पर तो सबका अधिकार
प्यार से जियें या अधिकार से जियें
बस ज़िन्दगी को जिंदगी की तरह जियें
फिर सोचे योगी खोजे मन
रिश्ते बड़े या प्यार बड़ा ?

यह कविता क्यों ? कुछ ऐसे एहसास होते हैं जो रिश्तों के बंधन रेखा से परे होते हैं जिंदगी भर निस्वार्थ हो साथ निभाते हैं प्यार तो हर रिश्ते का आधार है जब प्यार का आधार नहीं तो रिश्तो का क्या अस्तित्व खुद सोचे रिश्ते बड़े या प्यार बड़ा ?
अरविन्द योगी

ज़िन्दगी एक सड़क है


ज़िन्दगी एक सड़क है, सुख -दुःख की तड़प है
चलती है ज़िन्दगी, दौड़ती है जिंदगी
भागती है जिंदगी, हारती है जिंदगी
आना है जाना है , खोना है पाना है
हर मोड़ जिंदगी बेजोड़ है, न कोई तोड़ है न जोड़ है

किसकी याद में पागल पल पल रोता है
जिंदगी सड़क है, कुछ मिलता है कुछ खोता है
फुटपाथ पर जिंदगी जो सोता है
महल क्या जाने कितना वो रोता है
सड़क भी नहीं सोता, रात भर रोता है
फुटपाथ के साथ रात भर जगता है

हर सुख दुःख का दर्पण है सड़क
जिंदगी का समर्पण है सड़क
थक चुकी है हार चुकी है,
कुचल चुकी है उलझ चुकी है
फिर भी चलती जा रही है, भागती जा रही है
प्यार के तलाश में एक नए आश में
जिंदगी की सड़क या सड़क की जिंदगी

अनंत है जिंदगी की सड़क,सुख दुःख की तड़प
ना कोई किनारा है ना पड़ाव है, हर पल भगाव है
लड़खड़ा कर गिरती, उठती फिर गिरती
रफ़्तार है जिंदगी लाचार है जिंदगी
बस भागना है सफ़र नापना है
कुछ पाना है और कुछ खोना है
खोया हुआ पड़ाव है सड़क
हर पल नया जुडाव है सड़क
सच योगी जिंदगी एक सड़क है !

यह कविता क्यों ? जिंदगी एक सड़क है सबको भागना है यहाँ से पर जाना कहाँ है नामालूम है सब चले जा रहे हैं सो हम भी चले जा रहे हैं एहसास है क्या पा रहे हैं क्या खो रहे हैं यादों की धुल समेत रहे हैं पर खुद सोचे तो सच जिंदगी एक सड़क है !

अरविन्द योगी

किसी की आँखों मे मोहब्बत का सितारा होगा


किसी की आँखों मे मोहब्बत का सितारा होगा
एक दिन आएगा कि कोई शक्स हमारा होगा
कोई जहाँ मेरे लिए मोती भरी सीपियाँ चुनता होगा
वो किसी और दुनिया का किनारा होगा

काम मुश्किल है मगर जीत ही लूगाँ किसी दिल को
मेरे खुदा का अगर ज़रा भी सहारा होगा
किसी के होने पर मेरी साँसे चलेगीं
कोई तो होगा जिसके बिना ना मेरा गुज़ारा होगा

देखो ये अचानक ऊजाला हो चला,
दिल कहता है कि शायद किसी ने धीमे से मेरा नाम पुकारा होगा
और यहाँ देखो पानी मे चलता एक अन्जान साया,
शायद किसी ने दूसरे किनारे पर अपना पैर उतारा होगा

कौन रो रहा है रात के सन्नाटे मे
शायद मेरे जैसा तन्हाई का कोई मारा होगा
अब तो बस उसी किसी एक का इन्तज़ार है,
किसी और का ख्याल ना दिल को ग़वारा होगा

ऐ ज़िन्दगी! अब के ना शामिल करना मेरा नाम
योगी ग़र ये खेल ही दोबारा होगा !

यह कविता क्यों मोहब्बत एक एहसास है हवा का झोंका है फूलों की खुशबू है मन का संगीत है एक निस्वार्थ प्रीत है रिश्तों की अजीब सी अनकही सी रीत है मोहब्बत कोई शब्द नहीं अर्थ है जीवन का !
अरविन्द योगी

मै राजनीति हूँ


जिंदगी का पहला पाठशाला
राजनीति का अखाडा
पहले शब्द पर दांव खेलता
माँ भारती की छाँव बेचता
धरा बेचता गगन बेचता
कलि बेचता सुमन बेचता
भारत का अमन बेचता
राज को नीति में बांधता
इंसानों के पर काटता
बेहद मजबूत हूँ मै
मै राजनीति हूँ !

स्वर्णिम इतिहास है मेरा
हर युग में है एहसास मेरा
ना कोई बंधन ना कोई रिश्ता
ना कोई जाति ना कोई धर्म मेरा
ना कोई पिता ना कोई पुत्र मेरे राज में
कलयुग का सुपुत्र हूँ मै
भ्रस्ताचार है पिता मेरा
बहुत बुरा है सजा मेरा
क्योकि मै राजनीति हूँ !!

इतिहास बदला है
वर्तमान बदल रहा है
भविष्य भी बदलूँगा
भारत का भूगोल भी बदलूँगा
मुझसे ना टकराना प्यारे
हो जायेंगे तेरे वारे न्यारे
जिससे हर कोई हारे
मै वही राजनीति हूँ !!

दुनिया गुणगान मेरा गाता है
जो करता मेरी प्राण प्राण से पूजा
हर पल नाम कमाता है
अरे योगी मन क्यों मुझसे टकराता है
तुझे केवल कलम चलाना आता है
मै दुनिया चलता हूँ
मेरे लिए एक आता है
और एक चला जाता है
ये खेल बड़ा पुराना है
सबने लोहा माना है
मै सबका प्यार पर
मेरा ना कोई प्यारा है
मै राजनीति हूँ !!

यह कविता क्यों ? राजनीति वह कीचड है जिसमे हर कोई नहाता है और जो बच जाता है उसपे खुद ही कीचड लग जाता है राजनीति का भरा पूरा इतिहास है पूरी दुनियां में कोई ना आज तक जीत पाया है और ना ही जीत पायेगा राजनीति से ये बड़ा ही गन्दा और महान खेल है जिसमे इंसानियत नाम की कोई जगह नहीं है !!
अरविन्द योगी
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