Showing posts with label Hindi Sad Poem. Show all posts
Showing posts with label Hindi Sad Poem. Show all posts

Sunday, August 18, 2013

तेरी दखलंदाजी ना हो



तेरी दखलंदाजी ना हो,
तो थोड़ा शुकून मुझे भी मिल जाता
बैचारा अकेलापन, वक्त- बे-वक्त
तड़पने को मजबूर करता है|

और हम कदमें गिन-गिनकर
प्यार खोजते है , कभी - कभी|
पर निकम्मी निगाहे नहीं उठती,
डर अगर धोखे का ना हो
तो शायद हिम्मत भी जुट जाती|

उनके कहे लब्जों को तरसते कान,
किसी और को कहते सुनकर
उनमें खुशियाँ खोजते है|

खुशबु का क्या?
वो जब मिल जाये |
तो आंसू बूंद-बूंद बहकर,
अपनी ख़ुशी कहती है|

सच कहता हूँ ,
मुझ जैसा, आशिक कोई नहीं होगा|
लेकिन मेरे इश्क का सफ़रनाम 
सीतम की अन्तहीन, यादों से शुरू होती है 
बस अब तो, खुद की लाचारगी पर भी हँस देता हूँ , " मैं "|

Monday, January 14, 2013

अँधेरे में सुकून जलाये बैठे है


अँधेरे में सुकून जलाये बैठे है

ना ही आशियाना न ही एक दाना खाने को
जूझती ज़िन्दगी से एक आश लगाये बैठे है,

किसको कोसे तकदीर को या बीते जमीर को 
दुखो की जलती भट्टी में, सुख का आच लगाये बैठे है 

जहा ने जब भी ठुकराया झुटलाया हमारे सपनो को
रूह से दुवा, मगर दिल से प्यार जताए बैठे है 

एक तो वक़्त रूठा और ये घिनौनी सी दुनिया 
भेड़चाल भरी दुनिया में कहा किसी को फुर्सत 

सुक्र है "अंश" का जो दर्दे-ए-बया, कागज़ पे लिखाए बैठे है 
या खुदा सोजा तू भी काली रातो के संघ 

"अंश" तो आज अँधेरे में सुकून जलाये बैठे है..!

Tuesday, January 1, 2013

Amitabh Bachchan's poem for 'India's Daughter'




Actor Amitabh Bachchan wrote and recited a poem for the 23-year-old medical student who died in a Singapore hospital on 30 December 2012. He uploaded it on his official Facebook page.

Thursday, May 3, 2012

Aaj Dulhan Ke Laal Jode Mein (Hindi Sad Poem)



Aaj Dulhan Ke Laal Jode Mein,
Use Uski Saheliyon Ne Sajaya Hoga…

Meri Jaan Ke Gore Haathon per
Sakhiyon Ne Mehndi Ko Lagaya Hoga…

Bahut Gehra Chadega Mehndi Ka Rang,
Us Mehndi Mein Usne Mera Naam Chupaya Hoga…

Reh Reh Ker Ro Padegi
Jab Jab Usko Khayal Mera Aaya Hoga…

Khud Ko Dekhgi Jab Aaine Mein,
To Aks Usko Mera Bhi Nazar Aaya Hoga…

Lag Rahi Hogi Balaa Si Sunder Woh,
Aaj Dekh Ker Usko Chaand Bhi Sharmaya Hoga…

Aaj Meri Jaan Ne
Apne Maa Baap Ki Izzat Ko Bachaya Hoga…

Usne Beti Hone Ka
Doston Aaj Har Farz Nibhaya Hoga…

Majboor Hogi Woh Sabse Jyada,
Sochta Hoon Kis Tarah Usne Khud Ko Samjhaya Hoga…

Apne Haathon Se Usne
Hamare Prem Ke Khaton Ko Jalaya Hoga…

Khud Ko Majboot Bana Ker Usne
Apne Dil Se Meri Yaadon Ko Mitaya Hoga…

Bhooki Hogi Woh Jaanta Hoon Mein,
Kuch Na Us Pagli Ne Mere Bageir Khaya Hoga…

Kaise Sambhala Hoga Khudko
Jab Use Fairon Ke Liye Bulaya Hoga…

Kaampta Hoga Jism Uska,
Haule Se Pandit Ne Haath Uska Kissi Or Ko Pakdaya Hoga…

Mein To Majboor Hoon Pata Hai Use,
Aaj Khud Ko Bhi Bebas Sa Usne Paaya Hoga…

Ro Ro Ke Bura Haal Ho Jaayega Uska,
Jab Waqt Uski Vidayi Ka Aaya Hoga…

Bade Pyaar Se Meri Jaan Ko
Maa Baap Ne Doli Mein Bithaya Hoga…

Ro Padegi Aatma Bhi
Dil Bhi Cheekha or Chilaya Hoga…

Aaj Apne Maa Baap Ke Liye
Usne Gala Apni Khushiyon Ka Dabaya Hoga…

Reh Na Paayegi Juda Hoker Mujhse
Darr Hai Ki Zehar Chupke Se Usne Khaya Hoga…

Saturday, July 16, 2011

आधुनिक सच


मियां-बीबी दोनों मिल खूब कमाते हैं
तीस लाख का पैकेज दोनों ही पाते हैं


सुबह आठ बजे नौकरियों परजाते हैं
रात ग्यारह तक ही वापिस आते हैं

अपने परिवारिक रिश्तों से कतराते हैं
अकेले रह कर वह कैरियर बनाते हैं

कोई कुछ मांग न ले वो मुंह छुपाते हैं
भीड़ में रहकर भी अकेले रह जाते हैं

मोटे वेतन की नौकरी छोड़ नहीं पाते हैं
अपने नन्हे मुन्ने को पाल नहीं पाते हैं

फुल टाइम की मेड ऐजेंसी से लाते हैं
उसी के जिम्मे वो बच्चा छोड़ जाते हैं

परिवार को उनका बच्चा नहीं जानता है
केवल आया'आंटी' को ही पहचानता है

दादा-दादी, नाना-नानी कौन होते है?
अनजान है सबसे किसी को न मानता है

आया ही नहलाती है आया ही खिलाती है
टिफिन भी रोज़ रोज़ आया ही बनाती है

यूनिफार्म पहनाके स्कूल कैब में बिठाती है
छुट्टी के बाद कैब से आया ही घर लाती है

नींद जब आती है तो आया ही सुलाती है
जैसी भी उसको आती है लोरी सुनाती है

उसे सुलाने में अक्सर वो भी सो जाती है
कभी जब मचलता है तो टीवी दिखाती है

जो टीचर मैम बताती है वही वो मानता है
देसी खाना छोड कर पीजा बर्गर खाता है

वीक एन्ड पर मॉल में पिकनिक मनाता है
संडे की छुट्टी मौम-डैड के संग बिताता है

वक्त नहीं रुकता है तेजी से गुजर जाता है
वह स्कूल से निकल के कालेज में आता है

कान्वेन्ट में पढ़ने पर इंडिया कहाँ भाता है
आगे पढाई करने वह विदेश चला जाता है

वहाँ नये दोस्त बनते हैं उनमें रम जाता है
मां-बाप के पैसों से ही खर्चा चलाता है

धीरे-धीरे वहीं की संस्कृति में रंग जाता है
मौम डैड से रिश्ता पैसों का रह जाता है

कुछ दिन में उसे काम वहीं मिल जाता है
जीवन साथी शीघ्र ढूंढ वहीं बस जाता है

माँ बाप ने जो देखा ख्वाब वो टूट जाता है
बेटे के दिमाग में भी कैरियर रह जाता है

बुढ़ापे में माँ-बाप अब अकेले रह जाते हैं
जिनकी अनदेखी की उनसे आँखें चुराते हैं

क्यों इतना कमाया ये सोच के पछताते हैं
घुट घुट कर जीते हैं खुद से भी शरमाते हैं

हाथ पैर ढीले हो जाते, चलने में दुख पाते हैं
दाढ़-दाँत गिर जाते, मोटे चश्मे लग जाते हैं

कमर भी झुक जाती, कान नहीं सुन पाते हैं
वृद्धाश्रम में दाखिल हो, जिंदा ही मर जाते हैं :

सोचना की बच्चे अपने लिए पैदा कर रहे हो या विदेश की सेवा के लिए।
बेटा एडिलेड में, बेटी है न्यूयार्क।
ब्राईट बच्चों के लिए, हुआ बुढ़ापा डार्क।

बेटा डालर में बंधा, सात समन्दर पार।
चिता जलाने बाप की, गए पड़ोसी चार।

ऑन लाईन पर हो गए, सारे लाड़ दुलार।
दुनियां छोटी हो गई, रिश्ते हैं बीमार।

बूढ़ा-बूढ़ी आँख में, भरते खारा नीर।
हरिद्वार के घाट की, सिडनी में तकदीर।

तेरे डालर से भला, मेरा इक कलदार।
रूखी-सूखी में सुखी, अपना घर संसार
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...