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Monday, December 15, 2014

कृष्ण की दीवानी बनकर


कृष्ण की दीवानी बनकर मीरा ने घर छोड़ दिया।
इक राजा की बेटी ने गिरधर से नाता जोड़ लिया॥

नाचे, गावे मीराबाई, ले कर मन का इक तारा।
पग में घुँघरू, गले में माला, भेष जोगन का ही धारा।
राणा कुल की आन बान को, सब मीरा ने तोड़ दिया।
कृष्ण की दीवानी बनकर...........

पी गई मीराबाई देखो, राणा के विष का प्याला।
क्या बिगाड़ सकता है कोई, जिसका गिरधर रखवाला॥
मन मोहन के रंग में रंगकर, मीरा ने जग छोड़ दिया।
कृष्ण की दीवानी बनकर...........

श्याम शरण में जो भी आते, श्याम के ही बन जाते है।
भजन भाव में भक्त दयालु, मीरा के गुण गाते है॥
भव सागर से तिर गई मीरा, देह का बंधन छोड़ दिया।
कृष्ण की दीवानी बनकर

Sunday, June 29, 2014

Latest Jokes by Kumar Vishwas in Hisar (Hindi) (720p HD)



Watch out live jokes and poem of Kumar Vishwas in Hisar during his visit to Panchayat Bhawan (Hisar) on 15 December 2013.

Kumar Vishwas is a well-known Hindi Poet and a professor of Hindi Literature from Pilkhuwa, Ghaziabad, Uttar Pradesh. 

Vishvas is a Poet of Hindi language. He is a poet of Shringara-Ras (Romantic Genre). He has participated in several Kavi sammelan and is a very renowned poet. 

His fan communities on social networking websites like Facebook have largest number of fans as compared to other Hindi poets.

Besides being a known face among Hindi-knowing people across the world as a Poet, Dr Kumar Vishvas has been involving himself in several Social works and political movements like AAP.

Vishvas has been performing regularly in Kavi sammelan all over India and abroad. Besides performing in almost all parts of India, Dr Kumar Vishvas has also performed in countries like USA, Dubai, Singapore, Japan, Muscat, Abu Dhabi, Nepal.

Saturday, October 19, 2013

Hindi Poems by Surdas


Hindi Poem 1

प्रभू मोरे अवगुण चित न धरो ।

समदरसी है नाम तिहारो चा पारस गुण अवगुण नहिं चितवत कंचन करत खरो ॥

एक नदिया एक नाल कहावत मैलो ही नीर भरो ।

जब दौ मिलकर एक बरन भई सुरसरी नाम परो ॥

एक जीव एक ब्रह्म कहावे सूर श्याम झगरो ।

अब की बेर मोंहे पार उतारो नहिं पन जात टरो ॥

English Translation

Lord, heed not my faults!

You are known as he who sees as all equal,

At will you can take me across the ocean of existence.

One iron is used in worship, another in butcher's steel;

The philosopher's stone counts not merit or fault

But turns both to purest gold.

One is called "river", another a "rivulet" filled with murky water;

When they merge they become of one colour and are known

As "Sursari"(Ganges), river of gods.

The soul and the Supreme are given different names,

But all is one in Sur's Shyam.

This time, take me across, or give up your vow to be saviour!

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Hindi Poem 2

अखियाँ हरि दर्शन की प्यासी ।

देखो चाहत कमल नयन को, निस दिन रहत उदासी ॥

केसर तिलक मोतिन की माला, वृंदावन के वासी ।

नेहा लगाए त्यागी गये तृण सम, डारि गये गल फाँसी ॥

काहु के मन की कोऊ का जाने, लोगन के मन हाँसी ।

सूरदास प्रभु तुम्हरे दरस बिन लेहों करवत कासी ॥

English Translation

Our eyes thirst for a vision of Hari;

They long to see the lotus-eyed one,

Grieving for him day and night.

Wearing a saffron tilak and pearl garland

And dwelling in Vrindavan,

He gave us his love, then cast us aside like a blade of grass,

Throwing a noose around our necks.

No one knows what is in another's mind,

There is laughter in people's hearts;

But Lord of Surdas, without a vision of you

we would give up our very lives.

Sunday, August 18, 2013

तेरी दखलंदाजी ना हो



तेरी दखलंदाजी ना हो,
तो थोड़ा शुकून मुझे भी मिल जाता
बैचारा अकेलापन, वक्त- बे-वक्त
तड़पने को मजबूर करता है|

और हम कदमें गिन-गिनकर
प्यार खोजते है , कभी - कभी|
पर निकम्मी निगाहे नहीं उठती,
डर अगर धोखे का ना हो
तो शायद हिम्मत भी जुट जाती|

उनके कहे लब्जों को तरसते कान,
किसी और को कहते सुनकर
उनमें खुशियाँ खोजते है|

खुशबु का क्या?
वो जब मिल जाये |
तो आंसू बूंद-बूंद बहकर,
अपनी ख़ुशी कहती है|

सच कहता हूँ ,
मुझ जैसा, आशिक कोई नहीं होगा|
लेकिन मेरे इश्क का सफ़रनाम 
सीतम की अन्तहीन, यादों से शुरू होती है 
बस अब तो, खुद की लाचारगी पर भी हँस देता हूँ , " मैं "|

Monday, January 14, 2013

गुपचुप से जो आये इस दिल में पिया, लेके "जिया" दूर ना जाना


गुपचुप से जो आये इस दिल में पिया, लेके "जिया" दूर ना जाना, 
जो भीग आये तेरा कोरा मन, दिल की हर उलझन मुझसे ना छुपाना,

ना रखना बंद इन अधरों(होठ) को सनम, साथ ना दे जुबा तो आँखों से जाताना,
जो घिर आये दुखो के बदरा घरो पे, मेरे हिस्से की खुशियों से तू एक आशियाँना बसाना,

छोड़ो भी जिद देखो आयी प्यार की ऋतु, ले के "अंश" नाम अब ना शर्माना 
गुपचुप से जो आये इस दिल में पिया, लेके "जिया" दूर ना जाना...!!!

अँधेरे में सुकून जलाये बैठे है


अँधेरे में सुकून जलाये बैठे है

ना ही आशियाना न ही एक दाना खाने को
जूझती ज़िन्दगी से एक आश लगाये बैठे है,

किसको कोसे तकदीर को या बीते जमीर को 
दुखो की जलती भट्टी में, सुख का आच लगाये बैठे है 

जहा ने जब भी ठुकराया झुटलाया हमारे सपनो को
रूह से दुवा, मगर दिल से प्यार जताए बैठे है 

एक तो वक़्त रूठा और ये घिनौनी सी दुनिया 
भेड़चाल भरी दुनिया में कहा किसी को फुर्सत 

सुक्र है "अंश" का जो दर्दे-ए-बया, कागज़ पे लिखाए बैठे है 
या खुदा सोजा तू भी काली रातो के संघ 

"अंश" तो आज अँधेरे में सुकून जलाये बैठे है..!

Tuesday, January 1, 2013

Amitabh Bachchan's poem for 'India's Daughter'




Actor Amitabh Bachchan wrote and recited a poem for the 23-year-old medical student who died in a Singapore hospital on 30 December 2012. He uploaded it on his official Facebook page.

Thursday, December 13, 2012

कैसे दिन बीते कैसे बीती रतिया


नेहा लगा के मैं पछताई
सारी सारी रैना निन्दिया न आई
जान के देखो मेरे जी की बतिया
पिया जाने न
हाय
कैसे दिन बीते कैसे बीती रतिया
पिया जाने न

रुत मतवाली आ के चली जाये
मन में ही मेरे मन की रही जाये
खिलने को तरसे नन्ही नन्ही कलियाँ
पिया जाने न
हाय
कैसे दिन बीते कैसे बीती रतिया
पिया जाने न

कजरा न सोहे गजरा न सोहे
बरखा न भाये बदरा न सोहे
क्या कहूँ जो पूछे मोसे मोरी सखियाँ
पिया जाने न
हाय
कैसे दिन बीते कैसे बीती रतिया
पिय जाने न

Movie : Anuradha
Singer : Lata Mangeshkar
Music Director : Ravi Shankar

Pandit Ravi Shankar (Born: April 7, 1920, Varanasi, Died: December 11, 2012, San Diego)

Friday, November 9, 2012

ऑनर किलिंग


भस्म हो जाओ असुर,
खलनायक कहीं के,
पुस्तकों में पढ़ा है,

जो हमने लिखा है,
काले अक्षरों में,
उतने ही काले जितनी काली पहली की रात,
फिर दसवीं को जलते हुए,
हसंते क्यों हो?
किस पर?

अपनी बहन की कटी नाक को
इतना बड़ा मुद्दा बना दिया,
अपहरण तक कर लिया, कपटी.
निर्दोष थी उसने लक्ष्मण रेखा लांघने की गलती की,
ठीक है कि तुम ने मर्यादा नहीं लांघी,
तुमने छल तो किया ही था,
छल से ही हो, तुम हारे तो,
अच्छाई जीत गई. बुराई पर.
ये शिक्षा देने के लिए,
हर साल. साल दर साल.
सत्य की असत्य पर विजय,

ना बहस, न मुक़दमा,
सरल, संक्षिप्त, न्याय,
एक तीर नाभि पर,
तम का अंत, तुरंत.

वह पवित्र थी, तुमसे मरती भी नहीं,
वह मरी पवित्र हाथों से,
बुराई ने छुआ तक नहीं, अच्छाई ने मारा,
वह मरी रामराज्य में,
सिद्ध करते हुए,
स्वयं को निर्दोष,
तुम विकराल अट्टहास करते हो,
विशाल लपटों में घिरे,
बौने लोगों की लगाई आग में.
वह जलती है रोज़,
अपहृत होती है, पीड़ित होती है,
अमर्यादित होती, जला दी जाती है,
सिद्ध करते करते स्वयं को निर्दोष,
अग्नि परीक्षा,
प्रतिदिन, अनवरत!

तुम तो साल में एक बार ही,
अश्विन, शुक्ल पक्ष, दशमी की तिथि!
वह जलती है, तुम्हारे जलने से पहले.
तुम्हारे भस्म होने के बाद भी.

(English Translation)

Burn, you mad man! You, the villain,
The bad guy, in the history that we wrote!

A history that is told, and retold.
Year after year.

Your history is dark, as dark as the first night,
Yet on the tenth you burn, bright.
And laughing.
At us.

All for your sister’s honour, her already damaged nose,
You who snatched her,
Yet did not touch her.
You were cheated, defeated, taught a lesson.
A teaching we are taught, year after year.
Triumph of good over evil.

Summary execution, no trial,
No judge, no jury.
One shot to the abdomen,
and end of all misery!

She was pious,
She did not die in your evil custody,
She died, after she was free,
In the most just kingdom that could be,
At the hands of the good.
She died proving,
She was not damaged goods.

While you guffaw like a villain,
Your towering frame in the giant flame
That tiny men light.
She burns!
She is charred. Scarred.
Guilty until proven innocent.

Trial by fire.
Every day.
She is kidnapped, killed, violated,
Burnt alive.

You burn once a year.
Burn, you mad man!

Saturday, October 13, 2012

Where are You?.



Zindagi Itna Dard Deti Hai
Dil Me Fir Bhi Umeed Rehti Hai,
Dil Kehta Hai Ki Koi Yaad Nahi Karega,
Par Tum Yaad Karoge Yahi Umeed Rehti Hai.
 

Miss You.

Monday, September 17, 2012

Mohbbat Ki Hai Maine


Tere Akele Pann Se Mohbbat Ki Hai Maine
Tere Ehsaas Se Mohbbat Ki Hai Maine

Tu Mere Paas Nahi Phir Bhi
Teri Yaadon Se Mohbbat Ki Hai Maine

Kabhi Tu Ne Bhi Mujhe Yaad Kiya Hoga
Un Lamhon Se Mohbbat Ki Hai Maine

Jis Mein Sirf Teri Or Meri Batein Ho
Us Kitaab Se Mohbbat Ki Hai Maine

Jo Mahekta Ho Sirf Teri Mohbbat Se
Un Jazbaton Se Mohbbat Ki Hai Maine

Mera Tujh Se Milna To Ek Khwaab Sa Lagta Hai
Tere Intezaar Se Mohbbat Ki Hai Maine

Tujhe Yaqeen Ho Ya Naa Ho Lekin
Sirf Tujh Se Mohbbat Ki Hai Maine

Thursday, May 3, 2012

Aaj Dulhan Ke Laal Jode Mein (Hindi Sad Poem)



Aaj Dulhan Ke Laal Jode Mein,
Use Uski Saheliyon Ne Sajaya Hoga…

Meri Jaan Ke Gore Haathon per
Sakhiyon Ne Mehndi Ko Lagaya Hoga…

Bahut Gehra Chadega Mehndi Ka Rang,
Us Mehndi Mein Usne Mera Naam Chupaya Hoga…

Reh Reh Ker Ro Padegi
Jab Jab Usko Khayal Mera Aaya Hoga…

Khud Ko Dekhgi Jab Aaine Mein,
To Aks Usko Mera Bhi Nazar Aaya Hoga…

Lag Rahi Hogi Balaa Si Sunder Woh,
Aaj Dekh Ker Usko Chaand Bhi Sharmaya Hoga…

Aaj Meri Jaan Ne
Apne Maa Baap Ki Izzat Ko Bachaya Hoga…

Usne Beti Hone Ka
Doston Aaj Har Farz Nibhaya Hoga…

Majboor Hogi Woh Sabse Jyada,
Sochta Hoon Kis Tarah Usne Khud Ko Samjhaya Hoga…

Apne Haathon Se Usne
Hamare Prem Ke Khaton Ko Jalaya Hoga…

Khud Ko Majboot Bana Ker Usne
Apne Dil Se Meri Yaadon Ko Mitaya Hoga…

Bhooki Hogi Woh Jaanta Hoon Mein,
Kuch Na Us Pagli Ne Mere Bageir Khaya Hoga…

Kaise Sambhala Hoga Khudko
Jab Use Fairon Ke Liye Bulaya Hoga…

Kaampta Hoga Jism Uska,
Haule Se Pandit Ne Haath Uska Kissi Or Ko Pakdaya Hoga…

Mein To Majboor Hoon Pata Hai Use,
Aaj Khud Ko Bhi Bebas Sa Usne Paaya Hoga…

Ro Ro Ke Bura Haal Ho Jaayega Uska,
Jab Waqt Uski Vidayi Ka Aaya Hoga…

Bade Pyaar Se Meri Jaan Ko
Maa Baap Ne Doli Mein Bithaya Hoga…

Ro Padegi Aatma Bhi
Dil Bhi Cheekha or Chilaya Hoga…

Aaj Apne Maa Baap Ke Liye
Usne Gala Apni Khushiyon Ka Dabaya Hoga…

Reh Na Paayegi Juda Hoker Mujhse
Darr Hai Ki Zehar Chupke Se Usne Khaya Hoga…

Monday, April 30, 2012

मज़दूर दिवस पर एक ग़ज़


अबके तनखा दे दो सारी बाबूजी
अब के रख लो बात हमारी बाबूजी

इक तो मार गरीबी की लाचारी है
उस पर टी.बी.की बीमारी बाबूजी

भूखे बच्चों का मुरझाया चेहरा देख
 दिल पर चलती रोज़ कटारी बाबूजी

नून-मिरच मिल जाएँ तो बडभाग हैं
 हमने देखी ना तरकारी बाबूजी

दूधमुंहे बच्चे को रोता छोड़ हुई
 घरवाली भगवान को प्यारी बाबूजी

आधा पेट काट ले जाता है बनिया
 खाके आधा पेट गुजारी बाबूजी

पीढ़ी-पीढ़ी खप गयी ब्याज चुकाने में 
फिर भी कायम रही उधारी बाबूजी

दिन-भर मेनत करके खांसें रात-भर
 बीत रहा है पल-पल भारी बाबूजी

ना जीने की ताकत ना आती है मौत
 जिंदगानी तलवार दुधारी बाबूजी

मजबूरी में हक भी डर के मांगे हैं
बने शौक से कौन भिखारी बाबूजी

पूरे पैसे दे दो पूरा खा लें आज
 बच्चे मांग रहे त्यौहारी बाबूजी

Tuesday, April 3, 2012

कैसे कह दूं कि तुम्हें, याद नहीं करता हूँ



कैसे कह दूं कि तुम्हें, याद नहीं करता हूँ
दर्द सीने में हैं, फ़रियाद नहीं करता हूँ

तेरा नुक्सान करूं सोच नहीं सकता मैं
मैं तो दुश्मन को भी बरबाद नहीं करता हूँ

तेरी तारीफ़ सदा सच्ची ही की है मैनें
झूठे अफ़साने मैं ईजाद नहीं करता हूँ

साक़ी पैमाने से यारो मुझे है क्या लेना
किसी मैख़ाने को आबाद नहीं करता हूँ

मेरे अरमानों को तुमने है कुचल डाला सनम
मैं शिकायत कभी सय्याद नहीं करता हूँ

Monday, March 26, 2012

Yaadein



Wo School Ki Sidi Par Pyar Bhari Baate,

Aate Jato Per Comment Ki Barsate,

Wo Sylabus Ki Tension, Wo Exam Ki Raate,

Wo Canteen Ki Party,

Wo BitrhDay Ki Laate,

Wo Ruthna Manana,

Wo Bunk Wo Mulaqate,

Wo Lab Wo Library,

Wo Sona Temprary,

Wo Movie Wo Music,

Wo Cards Ka Magic,

Wo Proposal Ki Planing Mein Raat Ka Guzarna,

Har Ek Ko Dost Ki Bhabhi Bataana,

Lecture Se Jyaada Usko Niharna,

Fir Class Me Pichhe Ki Seat Pe Sona,

Uski Nazar Mein Sarif Ban Jaana,

Na Rahenge Wo Din,

Na Rahengi Wo Ratein,

Na Rahengi Wo Hassi Bhari Mulakaate,

Agar Rahengi Kuch To Bas Yaadein

Sunday, March 18, 2012

Aaj Mujhe Ek Gunaah Karne Do



Aaj Mujhe Ek Gunaah Karne Do,
Mujhe Tum Apne Aap Mein Khone Do,

Apne Aapko Meri Aagosh Mein Karke,
Mujhe Pariyo Ke Des Mein Khone Do,

Apni Chudiyon Ki Khan Khan Se
Tumhare Kaanon Mein Ras Gholne Do,

Apne Lambe Kaale Baalon Se
Ek Ghata Sawan Hone Do,

Apne Honthon Se Phir Mujhe
Ek Ghunt Jaam Pine Do,

Apni Muskurahat Se Phir Ek Seher Hone Do,
Apne Dilki Dhadkan Ko Aaj Betab Hone Do,

Aaj Ashiq Teri Aankhon Mein Phir Dekha Hai Apne Aapko,
Na Band Karna Ye Palkein Kuch Der Ke Liye To Apna Hone Do,

Aaj Mujhe Ek Gunah Karne Do,
Mujhe Tum Apne Aap Mein Khone Do,
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