Friday, August 12, 2011

भारत हूँ मै !


जिस भारत में चरण पादुका
भरत ने सर नवाया
केवट ने चरण जल को
जग का अमृतपान बनाया
जिस भारत के घाटों ने
जग को पार उतारा
स्वर्ग से प्यारा,भवसागर में सबसे न्यारा
धरती पर हूँ मै
भारत हूँ मै !!


जब भी हर युग का इतिहास बना है
इन्सान भी भगवान बना है
इन्सान ही शैतान बना है
खुशियों की बरसात हुयी है
अत्याचार का एहसास बड़ा है
परिवार बंटा है घर बार बंटा है
लोगों का अब प्यार बंटा है
जिस भारत में रिश्ते-नाते
अमर याद बन जाते ,जीवन देते औरों को
खुद को मौत दे जाते, माटी की शान बढ़ाते
देश प्रेम का फूल नया खिलाते
ऐसे वीर सपूतों का संचालक हूँ मै
भारत हूँ मै !!


आजाद, भगत सिंह, दत्त हूँ मै
देशप्रेमी हूँ मै , देशभक्त हूँ मै
राम हूँ मै, घनश्याम हूँ मै
दिलवाला हूँ मै, मतवाला हूँ मै
मस्ती का हाला हूँ मै, ग्वाला हूँ मै
हरे कृष्ण का जप हूँ, मै बुद्ध का तप हूँ मै
तन मन का मंदिर हूँ मै
तन मन का बल हूँ मै
किसानों का हल हूँ मै
गंगा का पावन जल हूँ मै
भारत हूँ मै !!


सो गया हूँ मै, खो गया हूँ मै, रो गया हूँ मै,
अपनों ने सुलाया है, गौरों से हाँथ मिलाया है
अस्मत बेचीं, भारत की किस्मत बेचीं
रिश्ते बेचे, नाते बेचे,लोगों की विश्वाशें बेचीं
जागूँगा मै, आज नहीं तो कल
अभी अपनों ने किया अँधेरा है
आखिर कब तक मुझसे दूर सबेरा है ?
कलम की क्रांति भारत नया बनाएगी
सुबहे-बनारस, शामे-अवध
कन्याकुमारी कश्मीर की शान
जर्रे-जर्रे में जिसके पलता स्वाभिमान
पल-पल बढता जिसका ज्ञान
अनादी हूँ मै, अनंत हूँ मै,योगी मन संत हूँ मै
जीवन जहाँ प्यार का नाम,
वहां पाप का संघारक हूँ मै
भारत हूँ मै !!



यह कविता क्यों ? अजर अमर अनादी काल से चराचर सभी सभ्यताओं व् परम्पराओं का प्रकाशक व् संरक्षक है भारत ! हिमालय सा अचल है एकता का बल है भारत !! श्रृष्टि में जगपालक है भारत !!

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